राष्ट्रीय (30/04/2015) 
सभी स्कूलों में लड़के लड़कियों के लिए बनेंगे अलग शौचालय

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि आगामी जून महीने तक हरियाणा के तमाम स्कूलों में लड़के व लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए जाएंगे। राज्य सरकार स्वच्छता को प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने जा रही है।

        मुख्यमंत्री ने यह जानकारी नई दिल्ली में आज स्वच्छ भारत मिशन पर मुख्यमंत्रियों के उप समूह की पहली बैठक में सांझा की। इस बैठक की अध्यक्षता उप-समूह के अध्यक्ष एवं आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने की। बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमईया सहित देश के अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

        मुख्यमंत्री ने कहा व्यक्तिगत घरेलू शौचालय बनाने में हमने 86 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया है। प्रदेश में स्वच्छता को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए हरियाणा पांच तालाब प्रणाली भी विकसित करने जा रहा है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में तरल कचरा प्रबंधन हेतु तीन स्तरीय तालाबीय प्रणाली 50 गांवों में सफलतापूर्वक विकसित कर ली है और अब इसे पायलट परियोजना के आधार पर नये डिजाइन और प्रौद्योगिकी के उपयोग के साथ पांच स्तरीय तालाबीय प्रणाली विकसित करने जा रहे हैं।

        मुख्यमंत्री ने बैठक में मांग रखी कि ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत शौचालयों के लिए 12,000 रुपये की केन्द्रीय सहायता उपलब्ध करवाई जाती है, लेकिन शहरी के तहत केवल 4,000 रुपये का प्रावधान है। ये दोनों राशियां कम से कम मलिन बस्तियों, अर्द्घ-शहरी क्षेत्रों और उन क्षेत्रों में जहां सीवरेज व्यवस्था नहीं है, एक समान होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक विशेष गांव के लिए ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबन्धन परियोजना की लागत राशि की सीमा में भी लचीलापन होना चाहिए।

        मुख्यमंत्री ने कहा कि बेशक सरकार की ओर से तमाम प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन स्वच्छ भारत मिशन के क्रियान्वयन के लिए हमें इसके वर्तमान सरकारी तंत्र को बदलकर असरकारी (प्रभावी) तंत्र की ओर जाना होगा तभी हम इसके सफल लक्ष्य को हासिल कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्रियों की उप-समूह की बैठक में सुझाव रखा कि सरकारी अधिकारियों पंचों, सरपंचों, विधायकों और सामाजिक एवं राजनैतिक नेताओं के साथ-साथ धार्मिक गुरुओं की भी इस सोच को बदलने में और स्वच्छ भारत को जन आंदोलन बनाने में एक बहुत बड़ी भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में करोड़ों लोग नियम से धार्मिक स्थलों पर जाते हैं। यदि हम धार्मिक नेताओं के शब्दों और कृतियों के माध्यम से स्वच्छता पर फोकस कर सकें तो हम उम्मीद कर सकते हैं हम हर मां-बाप तक स्वच्छ भारत का संदेश ले जा सकते हैं।

         स्वच्छ भारत मिशन में अर्द्घ-शहरी क्षेत्रों और सेंसस टाउन कहे जाने वाले क्षेत्रों के लिए उप समूह बनाने की पहल करने पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण  साफ-सफाई की देखभाल के लिए आम तौर पर पंचायत और पालिका की जिम्मेदारी तय नहीं है। मुख्यमंत्री ने बेबाकी से कहा कि किसी भी मिशन की सफलता के लिए नौकरशाही सीमित सोच पर चलते हुए कार्य करती है। हमें इस सोच को बदलने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज गांवों के लिए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और शहरों के लिए स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) है।

        मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सभ्यता ने हमेशा से ही अपनी,-अपने घर की, आस पड़ोस की और अपने गांव और शहर की साफ-सफाई रखने पर बल दिया है। आज भी हमारे महानगरों से लेकर सुदूर आदिवासी गांवों तक घर की रसोई और मंदिर में जूते उतार कर और पांव साफ करके जाने का रिवाज है। परंतु देश की राजनीतिक गुलामी के एक लम्बे अंतराल में हमारी सोच में एक भारी विकार आ गया। स्वच्छता की परिकल्पना तभी पूरी हो सकती है जब गली, गांव और शहर की स्वच्छता बनाए रखने को हम एक जन आंदोलन बना दें। उन्होंने कहा दरअसल हमने सफाई के कर्त्तव्य को अपने शरीर और घर तक सीमित कर लिया। कहीं न कहीं हमने यह मान लिया कि घर के बाहर की सफाई सरकार का काम है।

        मुख्यमंत्री ने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि जापान में दो हजार के करीब सरकारी स्कूल हैं और हर जापानी बच्चे को 9वीं कक्षा तक सरकारी स्कूल में पढ़ना अनिवार्य है। विकसित देश की हर सुविधा हर स्कूल में उपलब्ध है। परंतु दो हजार स्कूलों में एक भी सफाई कर्मचारी नहीं है। हर स्कूल में हर दिन एक पीरियड सफाई का होता है। 

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